परिचय
मान लीजिए आपने बैंक में FD की हुई है और हर साल उस पर अच्छा ब्याज मिल रहा है। लेकिन जब ब्याज का पैसा मिलता है तो आप देखते हैं कि बैंक ने उसमें से कुछ अमाउंट काट लिया। आप सोचते हैं – यह कटौती क्यों हुई? यह कटौती TDS होती है यानी Tax Deducted at Source।
अब सवाल यह है कि क्या इस TDS को बचाया जा सकता है? जी हाँ, और इसके लिए सरकार ने एक बहुत आसान रास्ता दिया है – फॉर्म 15G और फॉर्म 15H। ये दोनों फॉर्म बिल्कुल मुफ्त हैं, भरने में आसान हैं, और इनसे आपका कटा हुआ टैक्स बच जाता है।
फॉर्म 15G और 15H क्या है?
जब बैंक आपको FD पर ब्याज देता है और वह ब्याज एक तय सीमा से ज़्यादा होता है, तो बैंक उसमें से TDS काट लेता है। यह TDS सरकार के पास चला जाता है। लेकिन अगर आपकी कुल आमदनी इतनी कम है कि आप पर टैक्स नहीं बनता, तो यह कटौती बेकार है – आपका पैसा बेवजह कट रहा है।
इसी वजह से सरकार ने फॉर्म 15G और फॉर्म 15H बनाए। ये एक तरह की घोषणा होती है जो आप बैंक को देते हैं। इसमें आप कहते हैं- “मेरी आमदनी इतनी कम है कि मुझ पर टैक्स नहीं बनता, इसलिए मेरे ब्याज से TDS मत काटो।”
और बैंक इस घोषणा को मानकर TDS नहीं काटता। इस तरह आपका पूरा ब्याज आपको मिलता है।
अब सवाल यह है कि 15G और 15H में फर्क क्या है? तो चलिए यह भी समझते हैं:
- फॉर्म 15G : यह उन लोगों के लिए है जिनकी उम्र 60 साल से कम है। इसके अलावा, यह Hindu Undivided Family यानी HUF के लिए भी है।
- फॉर्म 15H : यह सिर्फ सीनियर सिटीजन यानी 60 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए है।
दोनों का मकसद एक ही है – TDS बचाना। बस उम्र के हिसाब से फॉर्म अलग होता है।
फॉर्म 15G और 15H से TDS कैसे बचाएं?
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि TDS आखिर कब कटता है। तो जानिए कि अगर आपकी FD पर एक साल में मिलने वाला ब्याज ₹40,000 से ज़्यादा हो जाए, तो बैंक TDS काट लेता है। वहीं दूसरी ओर, सीनियर सिटीजन के लिए यह सीमा ₹50,000 है।
लेकिन यह TDS तभी काटा जाता है जब बैंक के पास आपका 15G या 15H फॉर्म न हो। अगर आपने फॉर्म जमा कर दिया है, तो बैंक TDS नहीं काटेगा फिर चाहे ब्याज कितना भी हो।
इसलिए TDS बचाने का सबसे आसान तरीका यही है:
- हर आर्थिक वर्ष की शुरुआत में यानी अप्रैल में फॉर्म जमा करें।
- अगर आपकी एक से ज़्यादा बैंकों में FD है, तो हर बैंक में अलग-अलग फॉर्म जमा करें।
- फॉर्म में सही जानकारी भरें – नाम, PAN, आमदनी का अनुमान।
इस तरह बिना कोई झंझट के आपका TDS बच जाता है और आपको बाद में ITR भरकर रिफंड माँगने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
फॉर्म 15G और 15H कौन भर सकता है?
हर कोई यह फॉर्म नहीं भर सकता। इसलिए पहले यह जान लें कि आप इसके योग्य हैं या नहीं। नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
| शर्त | फॉर्म 15G (60 साल से कम) | फॉर्म 15H (60 साल और उससे ज़्यादा) |
| उम्र | 60 साल से कम | 60 साल या उससे ज़्यादा |
| नागरिकता | भारतीय नागरिक होना ज़रूरी | भारतीय नागरिक होना ज़रूरी |
| कुल आमदनी | टैक्स की सीमा से कम होनी चाहिए (₹2.5 लाख से कम) | कोई सीमा नहीं – बस टैक्स न बनता हो |
| ब्याज से आमदनी | कुल आमदनी से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए | कोई ऐसी शर्त नहीं |
| PAN कार्ड | ज़रूरी है | ज़रूरी है |
एक ज़रूरी बात – अगर आपकी कुल आमदनी टैक्स की सीमा से ज़्यादा है, तो आप यह फॉर्म नहीं भर सकते। ऐसे में TDS कटेगा और आप ITR भरकर रिफंड ले सकते हैं। लेकिन अगर आमदनी कम है, तो यह फॉर्म ज़रूर भरें।
फॉर्म 15G और 15H भरने की प्रक्रिया
फॉर्म भरना बहुत आसान है। आज के समय में यह काम आप घर बैठे online भी कर सकते हैं। चलिए समझते हैं:
ऑफलाइन तरीका:
- अपने बैंक की शाखा में जाएँ और फॉर्म 15G या 15H माँगें।
- फॉर्म में अपना नाम, पता, PAN नंबर, वित्त वर्ष और अनुमानित आमदनी भरें।
- साथ ही यह भी बताएँ कि आपने इसी साल किन-किन जगहों पर यह फॉर्म जमा किया है।
- फॉर्म पर हस्ताक्षर करें और बैंक में जमा कर दें।
- बैंक से एक रिसिप्ट लें ताकि आपके पास प्रूफ रहे।
ऑनलाइन तरीका:
- अपने बैंक की नेट बैंकिंग में लॉगिन करें।
- वहाँ “फॉर्म 15G” या “फॉर्म 15H” का ऑप्शन ढूँढें – यह आमतौर पर फिक्स्ड डिपोसिट या सर्विस सेक्शन में मिलता है।
- सभी जानकारी भरें और सबमिट करें।
- Submit होने के बाद आपके email पर कन्फर्मेशन आएगा। उसे संभाल कर रखें।

फॉर्म 15G और 15H के नियम और शर्तें
फॉर्म भरते वक्त कुछ ज़रूरी बातें ध्यान में रखें, नहीं तो बाद में परेशानी हो सकती है:
1. गलत जानकारी मत दें: फॉर्म में जो आमदनी आप लिखते हैं वो सही होनी चाहिए। अगर बाद में पता चला कि आपकी असली आमदनी ज़्यादा थी और आप पर टैक्स बनता था, तो जुर्माना लग सकता है। इसलिए हमेशा सही जानकारी दें।
2. हर साल फॉर्म जमा करें: यह फॉर्म सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए मान्य होता है। यानी अप्रैल से मार्च तक। इसलिए हर साल अप्रैल में नया फॉर्म जमा करना ज़रूरी है।
3. सभी बैंकों में अलग-अलग जमा करें: अगर आपकी तीन बैंकों में FD है, तो तीनों में अलग-अलग फॉर्म जमा करना होगा। एक फॉर्म से सभी बैंकों का TDS नहीं बचेगा।
4. PAN ज़रूरी है: बिना PAN के यह फॉर्म नहीं भरा जा सकता। और अगर आपने PAN नहीं दिया है तो बैंक 20% की दर से TDS काटता है।
5. फॉर्म में घोषणा ध्यान से पढ़ें: फॉर्म में एक जगह आप घोषणा करते हैं कि आपकी आमदनी टैक्स की सीमा से कम है।
वहीं दूसरी ओर, एक और बात – अगर आपकी FD साल के बीच में बनी है, तो उसी वक्त फॉर्म जमा कर दें। तब तक का TDS कट सकता है, लेकिन आगे के लिए बच जाएगा।
फॉर्म 15G और 15H जमा कब करें?
यह सबसे ज़रूरी सवाल है जो लोग अक्सर पूछते हैं। और इसका जवाब बहुत आसान है:
अगर आप अप्रैल में फॉर्म जमा करते हैं, तो पूरे साल का TDS बचता है। लेकिन अगर आपने देर कर दी – जैसे कि जून या जुलाई में जमा किया तो अप्रैल से उस महीने तक का TDS पहले ही कट चुका होगा।
इसलिए हर साल अप्रैल में यह काम पहले करें। इसे अपनी एक ज़रूरी आदत बना लें – जैसे कि नया साल शुरू होते ही फॉर्म जमा करो। इसके अलावा, अगर आपने साल के बीच में कोई नई FD खोली है, तो उसी दिन या अगले कुछ दिनों में फॉर्म जमा करें। जितनी जल्दी जमा करेंगे, उतना ज़्यादा TDS बचेगा।
और भी एक ज़रूरी बात – अगर आपने पिछले साल फॉर्म जमा किया था, तो इस साल भी नया फॉर्म जमा करना होगा। पुराना फॉर्म इस साल काम नहीं आएगा। यही कारण है कि बहुत लोग भूल जाते हैं और TDS कट जाता है।
निष्कर्ष
तो दोस्तों, अब आप अच्छी तरह समझ गए होंगे कि फॉर्म 15G और 15H क्या होते हैं और ये आपके लिए कितने फायदेमंद हैं। यह एक बहुत छोटा काम है – बस एक फॉर्म भरना है लेकिन इससे हर साल हज़ारों रुपये बच सकते हैं। आज के समय में जब हर पैसा मायने रखता है, तो इस तरह की छोटी-छोटी समझदारी बहुत काम आती है। इसलिए अगर आपने अभी तक यह फॉर्म नहीं भरा है, तो इसी अप्रैल में ज़रूर भरें।
साथ ही अपने परिवार के उन सदस्यों को भी बताएँ जिनकी FD है और जिनकी आमदनी टैक्स की सीमा से कम है। यही कारण है कि इस जानकारी को जितना फैलाएँ, उतना अच्छा है। सबसे बड़ी बात – यह फॉर्म मुफ्त है, आसान है, और इससे सिर्फ फायदा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या फॉर्म 15G और 15H ऑनलाइन जमा कर सकते हैं?
हाँ, बहुत से बैंक अब ऑनलाइन जमा करने की सुविधा देते हैं। आप अपने नेट बैंकिंग पोर्टल पर जाकर डिजिटल फॉर्म भर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ प्लेटफॉर्म्स जैसे Bajaj Finserv, WeRize पर भी इसी तरह का उदाहरण और गाइडेंस मिल जाती है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि कौन सा Form किसे भरना चाहिए।
2. अगर मैं फॉर्म 15G/15H देना भूल गया और TDS कट गया, तो क्या करें?
अगर TDS कट गया है, तो आपको रिटर्न भरकर वापसी का दावा करना होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि वापसी की प्रक्रिया में 6-8 महीने लग सकते हैं। इसलिए अगले साल से समय पर फॉर्म जमा करें।
3. फॉर्म 15G/15H की मान्यता कितनी होती है?
ये फॉर्म सिर्फ एक वित्तीय साल के लिए मान्य होते हैं। यानी अप्रैल से मार्च तक। इसके अलावा, हर साल नया फॉर्म जमा करना ज़रूरी है।
4. अगर मेरी दो बैंकों में FD है तो क्या दोनों में फॉर्म जमा करना होगा?
जी हाँ, बिल्कुल। हर बैंक में अलग-अलग फॉर्म जमा करना ज़रूरी है। एक बैंक में दिया गया फॉर्म दूसरे बैंक में काम नहीं आएगा। इसलिए जितनी बैंकों में FD है, उतने फॉर्म जमा करें।
